Sunday, 23 December 2012

आज की डायरी 23/12/2012 शनीवार
आज इंदौर में अपने स्कूल के दोस्त कैलाश (पप्पू) कुण्डल से मुलाकात  हुई । पप्पू ऒर में 1959 से लेकर 1963 तक दूसरी से छटी का दूध याद आने तक कन्नौद जिला देवास में  साथ पढ़े थे । ढेर सारी यादे ताजा की । कैलाश मध्य प्रदेश विधान सभा के पूर्व विधायक रह चुके हैं ।
अनलिमिटेड गैस सिलेंडर...!!!
- महेंद्र सांघी
Gas cylinders
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हाल ही में सरकार ने वर्ष में घरेलू गैस सिलेंडर की संख्या छ: तक सीमित करके सातवें सिलेंडर की कीमत बढ़ाकर अपने ही हाथों अपनी लोकप्रियता के ग्राफ को नीचे धक्का दे दिया। देश के हर नागरिक, चाहे वह अमीर हो या गरीब सबके मन में सरकार के इस निर्णय ने कड़वाहट घोल दी है।

दीपावली के त्योहारी माहौल में यदि सरकार अपनी छवि सुधारना चाहती है, तो उसे अर्थशास्त्र के फंडों के बजाय मार्केटिंग के फंडों को अपना लेना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह पुराने, गंदे, ठुके-पिटे उड़े रंग के सिलेंडर गरीबों को वर्ष में जितने चाहें उतने 500 रु. की कीमत पर ले जाने दें। इससे होने वाले घाटे की पूर्ति अमीर तबके के उन ग्राहकों से की जा सकती है, जो किसी वस्तु के गुणों की बजाय उसकी आकर्षक पैकिंग और विज्ञापन से प्रभावित होकर उसकी असल कीमत से कई गुना अधिक दाम खुशी-खुशी चुकाने के लिए तैयार रहते है।

मेरा दावा है कि नए नकोर सूर्ख लाल रंग के सिलेंडर के लिए घर की आंतरिक सज्जा के प्रति सजग कई गृहणियां आसानी से 600 रु.चुकाने को तैयार हो जाएंगी।

जिस तरह क्रॉकरी पर आकर्षक फूल-पत्ती बना दिए जाने पर उसकी कीमत बढ़ जाती है, उसी तरह फूल-पत्ती व आकर्षक रंगों से सजे सिलेंडर 700 से 800 रुपयों की कीमत में आसानी से बिकेंगे। ब्रांडेड शूज व कपड़े पहनने वालों के लिए प्लॉस्टिक में लिपटे अनेक तरह के इम्पोर्टेड सिलेंडर्स की रेंज लाई जा सकती है, जिनके एवज में एक से लेकर दो हजार प्रति सिलेंडर वसूले जा सकते हैं।

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विदेशी कार में विदेशी कुत्तों को घुमाते और फाइव स्टार होटल्स में दावतें उड़ाते दम्पतियों के लिए विशेष डिजाइनर सिलेंडर लाए जा सकते हैं, जिन्हें वे अपने स्टेटस सिंबल को बनाए रखने की खातिर चार-पांच हजार में भी खुशी-खुशी घर ले जाएंगे। ऐसे ग्राहकों को लुभाने के लिए उन्हें बताया जा सकता हैं कि इन सिलेंडर्स को पेक करते समय हायजीन का ध्यान रखा गया है, ताकि उनके चकाचक किचन में कीटाणु प्रवेश न करें।

काला बाजारी को रोकने के लिए कम्पनियां हर सिलेंडर को एक क्रमांक दे सकती है। ऐसी स्थिति में 786, 001, 555, 999 जैसे सभी विशिष्ट नंबरों वाले सिलेंडरों की नीलामी की जाकर अतिरिक्त रकम वसूली जा सकती है।

अमीर ग्राहकों को फंसाने के नुस्खे और भी हैं। बस कम्पनी को अपने विज्ञापन में यह बताना होगा कि उनकी गैस में विशिष्ट खुशबू मिलाई गई है, जो कि किचन से प्याज मसालों की दुर्गंध दूर कर देगी और मेहमान घर में प्रवेश करते ही वाह कह उठेंगे। खुशबू के प्रकार के अनुसार अतिरिक्त कीमत लूटी जा सकती है।

सरकार अर्थशास्त्रियों के बजाय मार्केटिंग के उस्ताद लोगों पर विश्वास करके देखें, वे एक सिलेंडर दस हजार में भी विज्ञापन देकर बेच देंगे कि इस सिलेंडर की गैस की खुशबू इतनी जानदार है कि यदि लीक हो जाए तो सात समंदर पार से सुंदरियां दौड़ कर आसपास इकठ्ठी हो जाएं।

मगर इन सबके लिए सरकार को सिलेंडरों की होम डिलीवरी बंद करनी होगी। तभी अमीर लोग बड़े-बड़े शोरूम्स से खुद गैस खरीदने आएंगे और दूसरों को दिखाकर अपना रौब जमाएंगे कि देखो हम कितना महंगा सिलेंडर वापरते हैं।

अंत में अत्यंत गरीब तबके के लोगों को सिलेंडर आधी कीमत पर भी दिया जा सकता है, जो कि मेड इन चाइना होगा और जिस पर वार्निंग लिखी होगी कि 'सावधान रहें, चाइना के मोबाइल की तरह यह फट भी सकता है।'

Tuesday, 18 December 2012

नेताओं का देव वाहन (ठेले को बनाया देव वाहन)

नेताओं को अमीर-गरीब सभी देवता की भाँति पूजते
जब पड़ती जरूरत उन्हें ही दौड़कर ढूँढते
एक नेता ने अपने चमचों से कहा कि
उनके लिए भी चुनें एक 'प्रतीक' देव वाहन
 
चुनाव के पहले ही चरण में भा गई विदेशी कार
जो एक उद्योगपति मित्र लाए थे उपहार
मगर स्वदेशी भावना के डर से
हो न सकी स्वीकार
 
एक कार्यकर्ता ले आया पुराने मॉडल की कार
तो नेताजी का जाग गया सोच
बोले कार को बना लिया 'देववाहन' तो
किस मुँह माँगेंगे गरीबों के वोट
 
एक समर्थक ने सुझाया ले आओ घोड़ागाड़ी
मगर सबने कहा कि नहीं-नहीं
प्रचार रुक जाएगा क्योंकि गलियों में 
घोड़ागाड़ी माँगेगी जगह ढेर सारी
 
एक उत्साही कार्यकर्ता अपना टेम्पो ले आया
थोड़े से चिंतन से ही यह समझ में आया
कि यह तो फैलाता है बहुत प्रदूषण
सबने उसे ससम्मान वापस लौटाया
 
क्या कोई उपयुक्त देववाहन न मिलेगा
नेताजी को लगने लगा डर
इक्कीसवीं सदी का एक युवा समर्थक
जाकर ले आया एक कम्प्यूटर
सभी ने किया कम्प्यूटर को प्रणाम
 
दिए विकल्प और आँकड़े और चलाया प्रोग्राम
तुरंत मॉनीटर पर अवतरित हुआ, महिमा सहित
एक कलरफुल ठेलागाड़ी का चित्र और नाम।बाजार हो या स्टेशन
शहर हो या गाँव का गली-कूचा
 
ठेला हर जगह सेवा करता हुआ
जहाँ जरूरत वहाँ जा पहुँचा
चाहे कोई इस पर सो ले
चाहे इस पर सजा ले अपनी दुकान
 
डीजल लगे न पेट्रोल
चाहे जितना लाद दो सामान
पाँच-पचास रुपए में यह
गरीब को मिल जाता
 
भारी जेब वालों से यह दिन में
हजार-पाँच सौ भी खींच लाता
बेरोजगारी का भी ठेला
करता है सुंदर निदान
 
कई डिग्रीधारी चला रहे
इसी से अपनी दुकान
यह सही है कि इसे धकाना
होता नहीं है आसान
 
मगर नेताओं के आगे-पीछे तो
होते ही हैं दो-चार पहलवान
नेताओं की होती है काया भारी-भरकम
ठेला सह सकता है आसानी से वजन
 
ऊपर से फिर यह रहता है खुला
सबको आसानी से होंगे दर्शन
दिखा सकती है धूप, पानी, हवा अपने हाथ
मगर नेताओं का तो है इनसे जन्म-मरण का साथ
 
नेता जब सड़क पर रहे, इनसे करता दो-दो हाथ
न्योछावर हो जाती जनता, कर देती वोटों की बरसात
ठेले के नीचे रहता है
एक और अतिरिक्त स्थान
 
टाट में लपेटकर आसानी से आ सकता है
नजर बचाकर सूटकेस जैसा सामानचुनाव बजट भी रहेगा सीमा में
पेट्रोल पर न खर्च होगी थोड़ी सी भी चिल्लर
तनिक भी कमी न आएगी शान में
 
आखिर ठेला भी तो है एक फोर व्हीलर
ठेले से अच्छा तैयार मंच क्या 
किसी चुनाव सभा में मिल पाएगा
गली में सभा हो या नुक्कड़ पर 
 
ठेला जहाँ ठेलेंगे चला जाएगा
सादगी और सरलता का प्रतीक है ठेला
जो नेता पहले अपनाएगा, अवश्य विजय पाएगा
वोटों के लिए झोली पड़ सकती है छोटी
 
ठेला इधर से वादे ले जाएगा उधर से वोट भर लाएगा
ठेला सबसे श्रेष्ठ है
सब वाहनों का राजा है
क्योंकि यह रहता है आगे
 
और इसे खुद इंसान धकाता है
जिस ओर होता है अधिक जोर
ठेला उसी ओर लुढ़क जाता है
बहुमत आधारित राजनीति के प्रति
 
कितनी सभ्यता दिखलाता है
ठेला हमारे राजनीतिज्ञों के 
चरित्र से भी बहुत मेल खाता है
आज की राजनीति में हर व्यक्ति 
 
एक-दूसरे को ठेलता नजर आता है
किसी ठेले वाले की किस्मत पर
कभी न खाइएगा तरस
आप निन्यानवे के फेर में जागते हैं
 
वह नींद लेता है मीठी और सरसदूर कॉलोनियों में बसे लोग
बाजार नहीं जा पाते हैं
धन्यवाद ठेले वालों का
जो दुकान आपके घर लाते हैं
 
इक्कीसवीं सदी में जब
मुश्किल हो जाएगा मिलना पेट्रोल
यारों तब पता चलेगा आपको कि 
ठेला चीज है कितनी अनमोल
 
दूसरी कमाइयाँ जहाँ लोगों की
आँखों में खटक सकती है
ठेले की खरे पसीने की कमाई पर
मजाल जो कोई आँख उठ सकती है
 
किस्मत वाले कुछ कुत्ते चाहे
बड़े ड्राइंगरूमों में बिस्कुट खाते हैं
सड़क के गरीब कुत्ते ठंड-बरसात में
ठेलों के नीचे ही सर छुपाते हैं
 
गर्म रातों में बंद कमरों में
सोना लगता है सजा।
किस्मतवाले हैं वे लोग जिन्होंने चखा है
ठेले पर खुली हवा में सोने का मजा
 
लाख रुपए की एक और बात है
ठेले में होता है आगा-पीछा एक समान
दो दिशाओं में चल सकने के कारण
दल-बदल रहेगा अत्यंत आसान
 
कम्प्यूटर द्वारा वर्णित महिमा पढ़कर
नेताजी को बहुत भा गया ठेला
बना लिया उसे अपना वाहन
चारों ओर बस छा गया ठेला!