Thursday, 28 February 2013

कछुआ-कमाई - खरगोश-महंगाई

वित्तमंत्री चिदम्बरम आज वर्ष 2013-14 का बजट संसद पटल पर रखने जा रहे हैं। चार लाईनों के माध्यम से  उन्हें जनता की और से एक सन्देश  अर्ज है कि :
कछुए की तरह रेंग रही है आमजन की कमाई   
खरगोश की तरह कुलांचे भर रही है महंगाई
दोनों के बीच का अंतर बढ़ता ही जाता है
ये मुआ खरगोश जरा भी नहीं सुस्ताता है

चुनावी वर्ष में वित्तमंत्री जी से निवेदन है कि
अपने इस खरगोश से कहें कि थोड़ी नींद निकाले
पता है कि कछुआ यह दौड़ नहीं जीत सकेगा मगर
कमा-कमा कर थका वह बेचारा भी तो थोड़ा सुस्ता ले

Wednesday, 27 February 2013

अपराध के तीन कारण


अपराध के लिये तीन चीजें जिम्मेदार हैं,
दारू का नशा, दारू का नशा और दारू का नशा,
दारू के ठेकों से पैसा कमाती सरकार को,
बस यह नहीं है पता, नहीं है पता, नहीं है पता।

रेल पर शेर



प्रश्न : दद्दू, रेलमंत्री जी ने रेल बजट प्रस्तुत करते हुए कुछ शेर पढ़ें। यदि आपको रेल पर शेर लिखना होते तो आप क्या लिखते?


उत्तर :
1.   बहारों से बात करनी है, चांद सितारों से बात करनी है, स्टेशन के बाद स्टेशन पार करना है, तो सिग्नलों से बात करनी
2.      रेल की छत पर बैठे बंदे को, गिरने का डर नहीं, पैर रखने की जगह नहीं ट्रेन में और हौसले भी बुलंद हैं।
3.      हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, हर हाल में मेरा टिकिट कन्फर्म होना चाहिए।

Tuesday, 26 February 2013

World Peace / विश्व शान्ति

कम्प्यूटर की मदद से हम नित नयी प्रगति के सोपान लिखते जा रहे हैं । यदि नए आविष्कार मानव हित के नहीं हुए तो मानव सभ्यता के नष्ट होने का खतरा बड़ता ही जायेगा। कवि का कम्प्युटर तथा वैज्ञानिकों से इन पक्तियों के माध्यम से प्रखर आग्रह है कि वे  ऐसी कोई  खोज करें कि  मानव मन से अपराध की भावना ही निकल जाये । ये पक्तियां मानवता की रक्षा के लिए कवि के दिल से निकली आवाज है।  

 
हे विज्ञान  हमें चाँद से आगे न ले जाओ 
मानव मन में उतना ही गहरे उतर जाओ 
दिल और दिमाग की ऐसी थाह पाओ 
मन निर्मल बना दो, विश्व शान्ति ले आओ 
 

Wednesday, 20 February 2013

बन्द को भगवान का समर्थन


प्रश्न : दद्दू, आज से लेकर दो दिनों के लिए 11 ट्रेड यूनियनों के द्वारा भारत बंद के आयोजन एवं उसके कारण आम जनता को होने वाली तकलीफों के बारे में आप क्या कहेंगे?

उत्तर : यही कि बंद के आयोजक अपने मन की संवेदनाओं के द्वार खुले रखकर उसे ऐतिहासिक बना दें। क्या यही अच्छा हो यदि आटो वाले बीमारों तथा रोगियों को अस्पताल ले जाने से मना नहीं करें, एम्बुलेंस व दूध वाहनों को आने-जाने दें, दवा की दुकानों को खुला रखें और अंत में यदि ट्रेन व बस को रोकें तो उसमें बैठे यात्रियों का स्वागत बारात की तरह कर उनके खाने-पीने तथा अन्य आवश्यक जरूरतों का इंतजाम करें और उनका दिल जीत कर अपनी मांगों के लिए समर्थन जुटा लें।

असली बंद तो वह होगा जब बंद के आयोजक खुद अपने घर में बंद रहें और उनके समर्थन में जनता ऐच्छिक रूप से काम बंद रखे। बंद दो दिनों के बजाय दो घंटों का भी तो हो सकता है। आह्वान किया जा सकता है कि लोग अपना काम दिन के ग्यारह बजे के बजाए एक बजे आरंभ करें। मांगें जायज होने पर ऐसे किसी भी बंद को जनता दिल से समर्थन देगी और देश का करोड़ों रुपयों का नुकसान भी नहीं होगा। वैसे आजतक किसी भी बंद के दौरान दद्दू ने किसी मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे पर ताला लगा नहीं देखा। इसका अर्थ क्या यह नहीं हुआ कि ईश्वर मांगों को मनवाने के लिए बंद जैसे कृत्य का कभी समर्थन नहीं करता है।

हाथों की लकीरों में किस्मत नहीं, अवसर होते है।



माँ का दिया हुआ अनमोल तोहफा होती हैं हाथों की लकीरें, 
इनमें 'माँ' अपनी झोली का सब कुछ दे देती है, 
अपनी माँ पर जो रखें विश्वास, निरंतर करे प्रयास, 
उन्हीं बच्चों की किस्मत बुलन्द होती है। 

(हाथों की लकीरों में किस्मत नहीं, अवसर होते है) 
                                 
                                                                                                 महेन्द्र सांघी

Tuesday, 19 February 2013

मेरी कलम से ताज़ा


                        
बातों का ओलम्पिक 
आजकल दिल और दिमाग से निकली बातें
होठों तक कम ही आती हैं,
वे तो माऊस पर सवार होकर
ऊंगलियों के बायपास से गुज़र कर
बातों के ओलम्पिक फेसबुक/ट्विटर पर
जोर-आजमाईश के लिये
सीधे ही उतर जाती हैं।

तुम्हारा माऊस 
( भविष्य में  जब लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या
अत्यंत कम हो जायेगी तो आने वाले प्रेम दिवसों पर वे लड़कियों को
शायद इस तरह प्रपोज़ करेंगे)

प्रिये, तुम्हारे प्यार में दीवाना हूँ
बहुत अच्छा 'खानसामा' हूँ
दुलहिन बन तुम आ जाओ मेरे हाऊस,
सदा बनकर रहूँगा मैं तुम्हारा माऊस

महेन्द्र सांघी

Monday, 18 February 2013

आतंकवादी हमले की पूर्व चेतावनी

प्रश्न : ददू, क्या आतंकी हमले के अपराधी को फांसी दिए जाने के पूर्व उसके परिजनों से उसकी अंतिम मुलाकात का प्रबंध किया जाना आवश्यक एवं मानवतावादी कदम है।

उत्तर : हां, आतंकी हमले के अपराधी को फांसी दिए जाने के पूर्व उसके परिजनों से उसकी अंतिम मुलाकात का प्रबंध किया जाना आवश्यक एवं मानवतावादी कदम होगा, बशर्ते कि उस आतंकवादी ने भी अपने हमले के संभावित क्षेत्र और समय की पूर्व-सूचना गुप्त फोन कॉल के द्वारा मीडिया को देने का मानवतावादी कदम उठाया हो जिससे कि उस समय के आसपास संभावित घटना क्षेत्र में रहने या जाने वाले लोग अपने-अपने परिजनों से अंतिम भेंट और संवाद करने की बाद ही अपने काम के लिए बाहर निकले। 

Wednesday, 13 February 2013

इजहार का वेलेंटाइन

मेरे प्रेमी, मेरे प्रियतम
तुम्हारा प्यार मुझे स्वीकार,
पर मेरी कुछ शर्तें हैं
समझाऊंगी नहीं, दूसरी बार।
गया जमाना समझ लो मिस्टर
पत्नी करती थी, घर का सब काम,
अखबार और चाय लेकर पति जी
कुर्सी पर फरमाते थे आराम।
सुबह जल्दी उठकर तुम्हें
बेड टी बनाना होगा,
उसके बाद ही समझ लो जनाब
आकर मुझे जगाना होगा।
जब तक मैं नाश्ता बनाऊंगी
तुम्हें अखबार पढ़कर सुनाना होगा,
तौलिया ढूंढना होगा स्वयं ही
जूते खुद चमकाना होगा।
ऑफिस जाने के पूर्व मुझे
मेरे ऑफिस छोड़कर आना होगा,
शाम को यदि चाहिए, होगी चाय
तो थोड़ा मेरा सिर दबाना होगा।
डियर खिलाऊंगी डिनर बढ़िया
बस बर्तनों को तुम्हें ठिकाने लगाना होगा,
सारी शर्तें साफ हैं प्रीतम
पहले स्टाम्प पर लिखवाना होगा।
नए जमाने के साथ कदम मिलाकर
चलकर तुम्हें दिखाना होगा,
स्त्रियों का दर्जा पुरुषों के बराबर है
यह सिद्ध करके दिखाना होगा।
यदि तुम्हें मेरी ये सारी
शर्तें हैं निःसंकोच स्वीकार,
तो इस प्यारे वेलेंटाइन डे पर
मेरी ओर से तुम्हें ढेर-सा प्यार।

Saturday, 9 February 2013

अफजल गुरु को फांसी

प्रश्न : दद्दू, सरकार ने अफजल गुरु को फांसी पर लटकाने में इतने वर्षों का अंतराल क्यों लिया?

उत्तर : इतने वर्षों तक सरकार उम्मीद कर रही थी कि वह अपनी स्वाभाविक मौत मर जाए और उसका इस मामले से आसानी से पिंड छूट जाए।

Wednesday, 6 February 2013

कुंभ में राजनीति

 
Kumbh politics
 
प्रश्न : दद्दू, क्या कुंभ में राजनीति करना गलत है।

उत्तर : हां, बशर्ते जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगना राजनीति में भी प्रतिबधित हो।