लोग समझते हैं कि चेन चोरी बहुत ही मुनाफे का धन्धा
है, मगर एक बार जरा इस करिअर क्षेत्र में आकर देखें तो आखें खुल जायेगी। आजकल की
महिलायें बहुत ही समझदार होती जा रही हैं। जब जब किटी पार्टी में जाती हैं, एक
दूसरे को समझाती रहती हैं कि चेन पहन कर बाहर मत निकला करो। कोई भी महिला चेन पहन
कर सडक पर निकली नहीं कि मोहल्ले की चार पडोसनें उसे ऐसे टोक देती है मानो देसी
दवा का नुस्खा बता रही हों। आज के जमाने की सासें भी चेन पहनकर मन्दिर कहाँ जाती
हैं? उन्हें तो बस सास-बहू सीरियल्स से ही फुरसत नहीं मिलती। चेन पहनने की औकात
रखने वाली मैडमें कार के बिना कहीं आती-जाती नहीं। अब गिनती की जो महिलाएं घर से
बाहर पैदल जाती हैं उनकी तलाश में हर रोज़ इतना पेट्रोल फुंक जाता है जितने में हफ्ते
भर की भाजी आ जाए। पिछले सालों में महंगाई और बेरोजगारी चार गुना बड़ गयी है मगर चेन चोरी के अवसर बमुश्किल डेढ गुना
हुए हैं। चोरों की संख्या मे वृद्धी की दृष्टि से देखें तो ये अवसर आधे ही रह गये
हैं।
लोगों को लगता है कि बस
एक झपट्टा मारा और 25-30 हजार रुपयों के वारे-न्यारे। मगर ऐसा नहीं है। चोरी में
सफल हो गये तो कम से कम तीन साथियों को पतली सी चेन का एक तिहाई टुकडा मिलता है वह
भी तब, जब आधी चेन शिकार के हाथ में नहीं रह गयी हो। उस टुकड़े को बेचने जाओ तो
बदले में आधे पैसे मिलते हैं। फील्ड मे बने रहने के लिये लगातार फिटनेस भी बनाये
रखना पडती है। क्रिकेट की तरह नहीं जहाँ पुराने प्रदर्शन की बदौलत गाड़ी भी चलती
रहती है और एड भी मिलते रहतें हैं।
हडबड़ी मे भागते समय अपन
या गाडी किसी से ठुक गयी तो समझ लो कि आधी कमाई गयी पानी में। कभी-कभी तो पूरी
गाडी छोड़कर भागना पडता है। सबसे बड़ा खतरा मौके पर पकड़ाने और भीड़ से पिटने का होता
है। भीड की मार के सामने पुलिस की मार भी कहीं नहीं लगती है। एक बार फंस गये तो
समझो महीने दो महीने के लिये बॉडी गयी अस्पताल में। वहाँ सही इलाज के लिये खीसे
में रोज एक चेन चाहिये। ठीक होने के बाद शरीर पालिश उतरी खोटी चेन की तरह दिखने
लगता है। रही-सही पालिश को पुलिस और वकील साहब कचहरी में उतार देते हैं।
मुसीबत एक नहीं कई होती
हैं। चेन चोरों को कोई भी बाप अपनी लड्की देना पसन्द नहीं करता है। ठीक ही तो है
जब हर गली-मोहल्ले में खुलेआम मूँछ पर ताव देकर गुन्डागर्दी करने वाले भाई लोग
मौजूद हैं तो कोई बाप क्यों कर किसी ऊठाईगिरे को अपनी लड़की देगा?
अब थोडी अन्दर की बात जो
किसी को नहीं पता वो भी बता दें। मोहल्ले के बच्चे जिन्हें धन्धे की खबर होती है
वे फिल्मी विलेन की तरह सिर्फ चाकलेट से नहीं मान जाते। उन्हें साथ में चाहिये
महंगे कोक, आलू-चिप्स और कुरकुरे के पेकेट। चेन मिलने की खबर के दिन तो मुए
डामिनोज के पिज्जा के बगैर नहीं मानते। मजेदार बात यह है कि साल की दो चेन घरवाली
जन्मदिन और शादी की वर्षगाँठ के नाम से झटक लेती है। हद तो तब हो गयी जब लाख
समझाने के बावजूद एक बार वह चेन पहन कर निकली और शिकार बन कर लौटी। अब चोर को क्या
पता था कि वह किसी हमपेशा की बीबी थी।
इस धन्धे में आगे आने
वाले खतरे का नाम टेटू है। हाल ही में एक महिला ने अपने गले में मंगल सूत्र का टेटू
बनवा लिया और जिन्दगी भर के लिये निश्चिंत हो गयी।
अपन ने तो बाबू पक्का मन बना लिया है कि पान की
गुमटी लगा लेंगे, मुंगफली बेच लेंगे पर चेन चोरी नहीं करेंगे।
रचियता
महेन्द्र सांघी