Monday, 20 May 2013

मेरी प्रिय पत्नी




पत्नी से मिली जली कटी भी
बहुत अच्छी लगती है,
जब वह उनके तवे या श्रीमुख से
गरमा गरम निकलती है।

पत्नी घर से आने जाने के लिये
चाहे लाख रोके टोके
शुक्र है वह गोष्ठी में आने के लिये
कभी मना नहीं करती है। 

पत्नी के मैके जाते ही
याद आ जाते हैं आटे दाल के भाव
किधर हैं रूमाल मोजे, मोबाईल पर पूछने पर
सालियाँ और सलहजें खूब हंसती हैं। 

रिमोट मेरे हाथ में देख पड़ोसी समझते हैं कि
टीवी मेरी उंगलियों के इशारों पर चलती है
असल में कब कौनसा चैनल चलेगा या बदलेगा
बगल में बैठकर पत्नी ही गाईड करती रहती है।

महीने की तारीख पहली हो या आखिरी
चेकबुक और एटीएम पत्नी स्वयं रखती है
मुझे ऑफलाईन जेबखर्च पकड़ा कर
सारे ऑनलाईन ट्रांजेक्शन खुद ही करती है।

खाने में आज क्या बनाना है
पूछ पूछ कर पत्नी रोज तंग करती है
हाँ यह बात अलग है कि बनता वही है
जिसमें श्रीमती जी की सुविधा और पसन्द रहती है।
 
पत्नी ने पूछा कि आपको मुझमें और आपकी कविता में
कौन अधिक अच्छी लगती है
मैने कहा आप, जो कि मेरी अधूरी कविताओं के ढेर को
मेरे बच्चों की तरह सहेज कर रखती है।

पत्नी ने पूछा कि 'ए' जी जरा बताओ
कितना प्यार तुम मुझसे करते हो
मैने कहा बस जरा सी खरोंच तुम्हारे तन को आ जाये
तो चोट मेरे दिल को लगती है।

No comments:

Post a Comment