जंगल
में एक दिन
एक
सत्ताधारी नेताजी का
शेर
से सामना हो गया,
नेताजी
ने आँखें बन्द कर
अपनी
कुर्सी को याद किया
और
सोचा कि बस आज
ज़िंदगी
और मौत के इस चुनाव में
उनका
काम तमाम हो गया।
अप्रत्याशेत
रूप से शेर ने
नेताजी
का स्वागत किया
और
अपनी गुफा में ले जाकर
प्रेम
पूर्वक बैठाया,
फिर
भी मारे डर के
भाषणवीर
नेताजी के मुख से
एक
शब्द भी
नहीं निकल पाया।
नहीं निकल पाया।
शेर
ने मुस्करा कर कहा कि
ए,
मेरे मित्र, राजनीति के शेर
कैसा
है तुम्हारा जलवा
हमारे
इस जंगल में आज कैसे
क्या
तुम्हारी डरपोक प्रजा ने
कर
दिया है तुम्हारे विरूद्ध बलवा।
हिम्मत
बटोर कर नेताजी ने कहा
कि
हे जंगल के राजा हे कृपानिधान
आपका
आतिथ्य पाकर
मैं
धन्य हुआ श्रीमान|
मगर जरा यह तो बताएं कि
मगर जरा यह तो बताएं कि
आप
मुझे किस तरह जानते है
आश्चर्य
हुआ यह जानकर कि
आप
मुझे भली तरह से पहचानते हैं।
शेर
ने कहा कि एक विदेशी दम्पत्ति
काटेज
में छोड़ गये थे अपना टीवी
शिकार
से निवृत्त होकर उसे ही
टापते
रहते हैं हम मियाँ और बीबी|
उसी
से ही पता चला कि तुम तो हो
हमसे
भी ज्यादा दुष्ट और कमीने
हम
तो भूखे होने पर ही शिकार करते है
भरे
पेट भी तुमने गरीबों के निवाले छीने|
जमानत
पर छूटे नेता के मुख की तरह
नेताजी
के चेहरे पर मुस्कान खेलने लगी
इस
परिस्थिति का फायदा उठाने के लिये
अक्ल
तेजी से दौडने लगी|
बोला
मित्र हमें अपने कुछ
विरोधियों
को निपटाना है
इल्जाम
हमारे उपर न आये
कुछ
इस तरह सलटाना है।
क्यों
न मुफ्त भ्रमण के बहाने
उन्हें
जंगल में भेज दिया जाये
निपटा
दें आप उन्हें, और आपको भी
दो
वक्त का भोजन मिल जाये|
चतुर
शेर ने पूछा कि बदले में
हमें
और क्या पेकेज मिलेगा
नेता
ने कहा कि आपका यह
जंगल
अभयारण्य बनेगा|
वादा
रहा कि यहाँ के पेड़
हम
नहीं काटेंगे.
आप
हमारी पीठ खुजालें
हम
आपकी खुजालेंगे।
इस
बीच शेरनी ने इशारे से
शेर
को अंदर बुलाया
अन्दर
बुला कर मानवों का
आतिथ्य
धर्म याद दिलाया|
पूछा
नाथ हम इन्हें क्या
खिलायेंगे
और पिलायेंगे
शेर
ने कहा खाने में तो चारा बहुत है
पीने
के लिये इंसानी खून मंगाएंगे|
तुम
चमचे गीदड़ को साथ लेकर
जंगल
के पास किसी खेत चली जाओ
किसान
का खून इन्हें बहुत पसन्द है
ताजा
ताजा वही ले आओ।
और
हाँ उस गरीब का पता जरूर ले आना
नेताजी
कल उसके घर अवश्य जाएंगे
सदभावना
के थोड़े से आँसू बहा कर
पार्टी के लिये अनेक
वोटों का जुगाड़ करवायेंगे।
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