सिरदर्द दुनिया की सबसे पुरानी बीमारी है आजतक जिसे जड़ से
उखाड़ फेंकने के लिये कोई प्रभावी इलाज नहीं खोजा जा सका है। डॉक्टरों के अनुसार
सिरदर्द के पीछे चार-पांच सौ कारण हो सकते हैं। शायद इसीलिये केंसर तथा घुटनों के
जोड़ों के दर्द का शर्तिया इलाज करने वाले भी सिरदर्द का अचूक इलाज का दावा करते
कभी नहीं देखे या सुने गये। गौर करें तो लगभग हर बीमारी के विशेषज्ञ मिल जायेंगे
किंतु सिरदर्द के विशेषज्ञ डॉक्टर का साईन बोर्ड या विज्ञापन हमें कभी देखने को
नहीं मिला।
सिरदर्द सर्वव्यापी, अमर और अविनाशी होता है। जिन्दगी और मौत की तरह यह कभी भी प्रकट हो सकता
है और कभी भी गायब। इसीलिये लोकतंत्र में यह काम से छुट्टी पाने का बहाना नम्बर एक
बना हुआ है। सिरदर्द मुफ्त में दिया-लिया जाता है किंतु इसके आदी हो चुके कुछ लोग
इसे मोल लेने के लिये भी तैयार हो जाते हैं।
सिरदर्द को पोलियो और चेचक की तरह जड़मूल सहित खत्म नहीं किया जा सकता है।
इसलिये लगता है कि सरकार ने इस बीमारी से निपटने की
अनोखी योजना बना रखी है। वह यह कि देश के हर नागरिक को भरपूर सिरदर्द दे दिया जाये
ताकि किसी को भी एक दूसरे से कोई शिकायत या जलन न हो। नतीजतन सिरदर्द सड़क छाप
इंसान से लेकर प्रधानमंत्री तक सबको होता है। ईमानदार को भी होता है, बेईमान को भी
होता है। इसी नीति के तहत सभी टीवी चैनल चौबीसों घंटों दिनरात अपने दर्शकों को
मनोरंजन कम और सिरदर्द अधिक बाँट रहे हैं। देश में जब जब सिरदर्द कम होने लगता है
तो सरकार पेट्रोल के दाम बड़ाने या रियायती गेस सिलेण्डर की संख्या सीमित कर देने
जैसे विशेष कदम उठाती है और सिरदर्द की नयी फसल पूरे देश में लहलहाने लगती है। देश
में सरकारी कामकाज इसीलिये धीरे होते हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को सिरदर्द
बाँटा जा सके।
सरकार की इस नीति को जनता का भरपूर सहयोग मिल रहा है। सिरदर्द लेना और देना
रिश्वत की तरह अब रिवाज बन गया है। पति-पत्नी, बेटे-बेटी, दोस्त-रिश्तेदार,
अड़ोसी-पड़ोसी, बेचवाल-खरीददार सब एक दूसरे को सिरदर्द बाँटने या अपना सिरदर्द दूसरे
के सिर पर ढोलने में लगे रहते हैं। ‘नेकी कर दरिया में डाल’ और ‘भलाई का जमाना न रहा’ जैसी कहावतों से साबित होता है कि अच्छे कामों का परिणाम
भी सिरदर्द के रूप में सामने आ सकता है। प्यार करने जैसी पाक प्रक्रिया भी सिरदर्द
से अछूती नहीं है। आज यदि ‘दिल दिया दर्द लिया’ फिल्म की रीमेक बने तो उसका नाम अवश्य ही ‘दिल दिया सिरदर्द लिया’ रखा जायेगा। कोर्ट-कचहरी के कई
मामले तो पुश्तेनी सिरदर्द में तब्दील हो जाते हैं।
मैं तो कहता हूँ कि देश की सारी समस्याओं का हल निकल सकता है यदि सिरदर्द का
इलाज ढूंड लिया जाये।
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