Tuesday, 29 January 2013

प्रिय कौशल जी
 
जिन्दगी में आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें
और वैधानिक तरीकों से खूब कमायें नोट
देश के पावन गणतंत्र के आप सफल मतदाता हों  
ईमानदार नेता चुनकर लाये आपका कीमती वोट
 
जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं
 
महेन्द्र सांघी
29 जनवरी 2013

Tuesday, 15 January 2013

पति पत्नी और 'वह'

प्रश्न : दद्दू, क्या आपकी और दादीजी की जिंदगी में किसी 'वह' का दखल रहा है? कृपया सच-सच बताइएगा?

उत्तर- सच बोलने में काहे का डर, काहे की शर्म। हर पति-पत्नी की जिंदगी में 'वह' का दखल होता है, सो हम दोनों की जिंदगी में भी रहा है।

सभी पति इस 'वह' को पूज्यनीय 'मां' तथा सभी पत्नियां उसे प्यारी 'सासू मां' कह कर पुकारती हैं।

पति-पत्नी और इस 'वह' के लव ट्रिंगल की कहानी उस 'वह' की कहानी से भी अधिक सनसनीखेज होती है जिससे आपका तात्पर्य है।

Monday, 14 January 2013

संक्रांति की पतंग


होली के रंग,
दीवाली के पटाखे, 
संक्रांति की पतंग
रक्षाबंधन के धागे

साथियों 31 दिसम्बर
और वेलेंटाईन डे
अवश्य मनाओ,
मगर जरा अपने इन
भारतीय त्योंहारों को भी तो
विदेश पहुँचाओ। 

महेन्द्र सांघी
14 जनवरी 2013



कटी पतंग



प्रश्न : दद्दू, कटी पतंग अक्सर बिजली के तारों से जाकर क्यों अटक-लटक जाती हैं?

उत्तर : क्योंकि पतंगों को बिजली के लंबे तारों में अपने से बिछड़ी 'डोर' की छवि नजर आती है।

Thursday, 10 January 2013

संत को प्रणाम

संत को प्रणाम 

 एम के सांघी
प्रश्न : हाल ही में आसाराम बापूजी ने स्वयं की तुलना हाथी से तथा अपने आलोचकों की तुलना भौंकने वाले कुत्तों से की है। इस स्तर के संत यदि हमारे समक्ष आएं तो क्या हमें उन्हें प्रणाम करना चाहिए?

उत्तर : वाणी से वे संत भले ही न लगें पर दिखने में तो लगते ही हैं। संत की पदवी भी धारण की हुई है। बात अफसोसजनक होते हुए भी सच है कि आज के जमाने में जाने-अनजाने किसी भी व्यक्ति का सम्मान हम उसके गुणों के बजाय उसके पद, पैसे और पहनावे के आधार पर करने के अभ्यस्थ हो चुके हैं।

अनेक भ्रष्ट नेता-अधिकारी, ढोंगी साधु-संत, समाज में पैसे के बल पर सुप्रतिष्ठित व्यक्ति अपने गलत-सलत कार्यों और उलूल-जलूल बयानों के कारण चाहे जितने अलोकप्रिय हों मगर जब सामने आते हैं तो नमस्कार, प्रणाम और चरण स्पर्श जैसे सम्मान तथा हार-गुलदस्तों से नवाजे ही जाते हैं। आसाराम जी भी सामने आने पर भक्तों के साथ-साथ अपने आलोचकों का भी प्रणाम पाते रहेंगे। शायद यही हमारी कमजोरी भी है कि हम ऐसे लोगों के प्रति अपना असम्मान मन में छुपा कर रखते हैं और उसे प्रत्यक्ष रूप में व्यक्त करने के अवसर विपक्षी राजनैतिक दलों पर छोड़ देते हैं। इस संबंध में दिल्ली गैंग रेप के विरोध में उपजा जनआंदोलन एक सुखद बदलती बयार है।

Wednesday, 9 January 2013

पिट कर ही बात समझ में आती है क्या पाकिस्तान?


प्रिय पड़ोसी पाकिस्तान
तुम हमारे ही अंश हो

अत: प्रेम से समझाते हैं
समझ सको तो समझ लो

अन्यथा हमें समझाने के
और भी कई तरीके आते हैं।

अपनी संस्कृति के अनुरूप
हम शांति कपोत उड़ाते हैं

किंतु वतन की सुरक्षा के लिये
हम गोलियाँ और बम भी बरसाते हैं।

मृदुभाषी हैं हम पर हमारे देश में
युद्ध गीत भी रचे जाते हैं

जिनसे उत्साहित होकर हमारे
सूरमा सैनिक जान पर खेल जाते हैं।

सर्वधर्म में विश्वास रखते हैं हम परंतु
तिरंगे के नीचे एक धर्म हो जाते हैं

युद्ध में तुम जानते ही हो फिर
हम कैसा मजा चखाते हैं।

मित्रता का उत्तर तो मित्रता है ही
दुश्मनों की और भी हम दोस्ती का हाथ बड़ाते हैं

दुश्मन को दोस्ती के स्वर रास न आये तो
कूटनीति के स्वर भी हमें आते हैं

यदि तुम युद्ध में विश्वास रखते हो तो याद कर  लेना
पिछले युदधों की कितनी कीमत तुमने चुकाई है

अगले किसी युद्ध की कीमत बहुत ज्यादा होगी
क्योंकि विश्व में बड़ चुकी मँहगाई है।

सीमा पार से उकसाने की कार्यवाही
और कायराना हमले करना तुम भूल जाओ

यदि पिट कर ही बात समझ में आती है तो
एक और सर्जिकल स्ट्राईक के लिये तैयार हो जाओ।

महेन्द्र सांघी



Tuesday, 8 January 2013

हाथ-पैर जोड़ लेती तो?

प्रश्न : दद्दू, आसाराम बापूजी का विवादित बयान आया है कि दिल्ली गैंग रेप की पीड़िता लड़की यदि आरोपियों में से किसी को भी भाई संबोधित करके उनके हाथ-पैर जोड़ लेती तो उसकी इज्जत व जान बच सकती थी। आप इस बारे में क्या कहेंगे?



उत्तर : यही कि सभी राजनैतिक व धार्मिक नेताओं के ऊटपटांग तथा विवादित बयान रोके जा सकते हैं, यदि देश की जनता उनके हाथ-पैर जोड़ ले तो।

Monday, 7 January 2013

क्या दुष्कर्म की सजा फांसी हो?

प्रश्न :

दद्दू, आपके विचार में क्या दुष्कर्मियों को फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए, जिसकी मांग दिल्ली में हाल की के गैंग रेप मामले के बाद देश की लगभग पूरी जनता द्वारा की जा रही है और क्या इस सजा के भय से ऐसे अपराध कम होंगे? 

उत्तर :

नहीं, क्योंकि यह बहुत आसान मौत होगी। उन्हें फांसी पर लटकाए जाने के बजाय उम्र कैद दी जानी चाहिए और कैद की इस पूरी अवधी के दौरान हर माह में एक दिन सुबह से शाम उन्हें पैरों से बांध कर शहर के चौराहे पर उल्टा लटका दिया जाना चाहिए। इसी तरह की सजा दुष्कर्मियों के मन में डर पैदा कर सकेगी।

Tuesday, 1 January 2013

मित्रों
फिल्म पूर्णिमा के लिये मशहूर गीतकार गुलजार द्वारा रचित गीत " तुम्हें जिन्दगी के उजाले मुबारक" पर आधारित यह पेरोडी आपको समर्पित है। इसे देश के नेताओं के नववर्ष के बयान की तरह पढें।

तुम्हें जिन्दगी के अंधेरे मुबारक
उजाले हमें आज रास आ गये हैं
तुम्हें छोड़कर आसमां चड़ गये हैं
तुम्हें चींटियों सा लघु पा रहे हैं।

हमारे नफे से शिकायत न करना
किस्मत हमारे, गल ये समझना
कुर्सी है सूरज, उसे पा गये हैं
उजाले हमें आह रास आ गये हैं।

क्यों पीछे पड़े हो ये इल्जाम लेकर
बहुत एश में हम तुम्हें टेक्स देकर
चलो थोड़ी सबसिडी बरसा रहे हैं
उजाले हमें आज रास आ गये हैं।

महेन्द्र सांघी
1.1.13