प्रिय पड़ोसी पाकिस्तान
तुम हमारे ही अंश हो
अत: प्रेम से समझाते हैं
समझ सको तो समझ लो
अन्यथा हमें समझाने के
और भी कई तरीके आते हैं।
अपनी संस्कृति के अनुरूप
हम शांति कपोत उड़ाते हैं
किंतु वतन की सुरक्षा के लिये
हम गोलियाँ और बम भी बरसाते हैं।
मृदुभाषी हैं हम पर हमारे देश में
युद्ध गीत भी रचे जाते हैं
जिनसे उत्साहित होकर हमारे
सूरमा सैनिक जान पर खेल जाते हैं।
सर्वधर्म में विश्वास रखते हैं हम परंतु
तिरंगे के नीचे एक धर्म हो जाते हैं
युद्ध में तुम जानते ही हो फिर
हम कैसा मजा चखाते हैं।
मित्रता का उत्तर तो मित्रता है ही
दुश्मनों की और भी हम दोस्ती का हाथ बड़ाते हैं
दुश्मन को दोस्ती के स्वर रास न आये तो
कूटनीति के स्वर भी हमें आते हैं
यदि तुम युद्ध में विश्वास रखते हो तो याद कर लेना
पिछले युदधों की कितनी कीमत तुमने चुकाई है
अगले किसी युद्ध की कीमत बहुत ज्यादा होगी
क्योंकि विश्व में बड़ चुकी मँहगाई है।
सीमा पार से उकसाने की कार्यवाही
और कायराना हमले करना तुम भूल जाओ
यदि पिट कर ही बात समझ में आती है तो
एक और सर्जिकल स्ट्राईक के लिये तैयार हो जाओ।
महेन्द्र सांघी