Wednesday, 17 July 2013

ब्लड प्रेशर



डॉक्टर ने मेरा ब्लड प्रेशर नापा 
तो उसे एकदम से चक्कर आ गया,
आँखें फटी की फ़टी रह गयीं
गश खाकर बेचारा ज़मीं पर आ गया।

मैने उसके मुहँ पर पानी के छींटे मारे
अखबार से पंखा झला
फिर उसके जूते उतारे
और तलुओं को हौले से मला

तब कहीं जाकर
वह कुछ होश में आया
होश में आकर
धीरे से बुदबुदाया 

बोला कि मेरा यंत्र तुम्हारा
ब्लड-प्रेशर ज़ीरो बता रहा है
मुझे समझ नहीं आ रहा कि
तुम्हारा दिल कैसे धड़क पा रहा है

मैं हंसा कि डॉक्टर साब परेशान न हों
मैं अपने खून की हर बूंद को जानता हूँ
हर बूंद के हर कण की मैं
जात और रंग पहचानता हूँ

मेरे खून के सफेद और लाल रक्त कण
सत्ता के लिये दिन-रात लड़ते रहते हैं
ऑक्सीजन के वहन और वितरण में 
दोनों के गुट भारी भृष्टाचार करते हैं

श्रेय और स्वार्थ के लिये खून का हर कण
जब रंग के आधार पर एक दूजे से लड़ेगा
तो भला आप ही बताईये जनाब
ऐसे खून में फिर प्रेशर कहाँ से रहेगा।
हाथों मे जनाब प्रेशर तब आता है
जब एक हाथ दूसरे से मिल दोस्ती निभाता है
आजकल अपने देश का प्रेशर भी तो रसातल में है
क्योंकि हर नेता दूसरे नेता का गला दबाता है।

अंत में डॉक्टर साब आपने पूछा कि
बिन प्रेशर मेरा दिल कैसे धड़क रहा है
सीधी-सच्ची  बात है ठीक उसी तरह,
जिस तरह आजकल मेरा देश चल रहा है।