हाल ही में मेरे एक फेसबुक फ्रेंड एवं कवि के पिता श्री का दुखद निधन हो गया। उन्होंने अपने पिता को समर्पित करते हुए एक भावपूर्ण रचना पोस्ट की। ग्रुप के कुछ मित्रो ने घटना पर दुख जताया, ढ़ाढस के दो शब्द लिखे तथा रचना को भावपूर्ण बताते हुए उसकी तारीफ की।
इसके विपरित कुछ मित्रों के कमेंट मुझे ठीक नही लगे जैसे कि 'सुपर' या 'वाह', या अति-सुन्दर या 'बहुत अच्छे'। निश्चित रूप से ये कमेंट दुखद घटना के स्थान पर उनके उत्कृष्ट रचना के बारे में थे। मगर कमेंट करने वाले मित्रों को सोचना चाहिये कि उस उत्कृष्ट रचना के साथ एक दुखद घटना भी जुड़ी हुई थी। क्या रचना की उत्कृष्टटता की तारीफ से ज्यादा जरूरी उस दुखद घटना पर दुख व्यक्त करना नहीं है। यदि हमारे पास समय का अभाव है तो बेहतर होगा कि हम कमेंट ही ना करें। और यदि करें तो सही ढ़ग से करें। ऐसे अवसर पर लिखी रचना को उत्कृष्ट और भावपूर्ण अभिव्यक्ति कहा जा सकता है किंतु काव्य के माध्यम से दी गयी निधन की सूचना का जवाब 'सुपर' या 'वाह', या अति-सुन्दर या 'बहुत अच्छे' शब्दों से दिया जाना क्या आपको भी थोड़ा अजीब नहीं लगता है। यह उसी तरह से है कि किसी दुखद घटना की पोस्ट को भी हमारे कई मित्र 'लाईक' क्लिक कर देते हैं। आशा है कि आप मुझसे सहमत होंगे।
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