Tuesday, 19 February 2013

मेरी कलम से ताज़ा


                        
बातों का ओलम्पिक 
आजकल दिल और दिमाग से निकली बातें
होठों तक कम ही आती हैं,
वे तो माऊस पर सवार होकर
ऊंगलियों के बायपास से गुज़र कर
बातों के ओलम्पिक फेसबुक/ट्विटर पर
जोर-आजमाईश के लिये
सीधे ही उतर जाती हैं।

तुम्हारा माऊस 
( भविष्य में  जब लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या
अत्यंत कम हो जायेगी तो आने वाले प्रेम दिवसों पर वे लड़कियों को
शायद इस तरह प्रपोज़ करेंगे)

प्रिये, तुम्हारे प्यार में दीवाना हूँ
बहुत अच्छा 'खानसामा' हूँ
दुलहिन बन तुम आ जाओ मेरे हाऊस,
सदा बनकर रहूँगा मैं तुम्हारा माऊस

महेन्द्र सांघी

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