Saturday, 8 March 2014

सन टु हुमन मेडीटेशन इंट्रोडक्शन केंप' - 18



सन टु हुमन मेडीटेशन इंट्रोडक्शन केंप' - 18
एक बार फिर से ईशकृपा गार्डन, बंगाली चौराहे के पास सुबह 6:30 एवं शाम 6:00 बजे से। दस दिवसीय पूर्णतया निशुल्क। वर्थ टु बी अटेंडेड। 

दिनांक 26/12/2011 के केम्प के बारे में नईदुनिया में "इन्दौरीपन की एक पहचान को बॉय-बॉय" शीर्षक से प्रकाशित मेरा आलेख
  
इस शीर्षक को पढकर आप चौकिये या हँसिये मत। अपने इंदौरीपन की प्रमुख पहचान के बारे में आप यहाँ के किसी भी बाशिंदे से पूछेंगे तो वह नींद में भी यही जवाब देगा कि पोहा-जलेबी, समोसा-कचोरी का नाश्ता और खाने की अनेकों वैरायटीयों के साथ लोंग़ की सेंव का तडका। कोई भी इन्दौरी इन खाद्य पदार्थों के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता। मगर यह असम्भव सम्भव में बदल सकता है यदि आप मेरी तरह पप्पू भैया के निशुल्क दस दिवसीय ' सन टु हुमन मेडीटेशन इंट्रोडक्शन केंप' अटेंड करें जिसमें सन टु हुमन लिव इन रिलेशनशिप एवं हम और हमारे बच्चे इनर्जी से भरपूर कैसे हों, के बारे में बताया, सिखाया और करवाया जाता है। बंगाली चौराहे के पास ईशकृपा गार्डन में 18 दिसम्बर 2011 से जब यह केम्प आरम्भ हुआ तो अपने राम ने यह कह कर दो दिन निकाल दिये कि भई अपन तो नौकरी वाले हैं, समय पर काम पर जाना होता है, फिर ठंड में जल्दी उठते भी नहीं बनता। जब अगले दो दिनों तक केम्प की खूब तारीफ सुनी, कॉलोनी के सब लोग अलसुबह नवरात्री के देवी-दर्शन की तरह गार्डन की और जाते दिखाई दिये तो मन नहीं माना और चौथे दिन अपन भी सपत्नीक इस यज्ञ में शामिल होने चल दिये। हिदायत थी कि यथासम्भव ठंडे ठंडे पानी से नहाकर बिना चाय-बिस्कुट खाये-पिये आना है मगर अपन बिना नहाये चाय गटक कर केंप पहुँच गये। वहाँ जाकर देखा कि सभी लोग शर्ट और बनियान उतार कर और सूर्य की और मुख करके भरी ठंड में दोनों हाथ ऊपर किये जम्पिंग कर रहे हैं ताकि सूर्य की ऊर्जा अपने शरीर में समाहित कर सकें, अपने फेफडों में अधिकतम ऑक्सीजन पहुँचा कर उन्हें स्वस्थ बना सकें, घुटनों के जोडों को मजबूत बना सकें और साथ ही पैरों के तलुओं का व्यायाम कर सुप्त नाडी केन्द्रों को जाग्रत कर सकें। बताया गया कि प्रात: सूर्य के सामने की गयी यह जम्पिंग हमें दिन भर के लिये चार्ज कर देती है। उसके बाद शुरू हुआ " अरे जा रे नटखट न छेड मेरा घूंघट" जैसे अनेक मधुर गीतों की धुन पर सामुहिक नृत्य। विशाल जनसमूह के हाथ पैर और कमर मस्ती में थिरक उठे। सभी इस नृत्य के माध्यम से न केवल उत्तम व्यायाम कर रहे थे बल्कि सूर्य के आशीर्वाद के रूप में और अधिक ऑक्सीजन ले रहे थे और साथ ही अपने शरीर को लचीला भी बनाते हुए आनन्द मग्न हो रहे थे। मुझे लगा कि रोज सुबह के मेरे बोरिंग मार्निंग वाक से यह व्यायाम अधिक उपयुक्त था। व्यायाम के हर एक्शन के पीछे छुपी लॉजिक को भी समझाया जा रहा था। हाथ ऊपर रखने से हार्ट को खून ऊचाई पर पहुचाना पडता है अतः वह मजबूत होता है साथ ही ऊंगलियों के माध्यम से शरीर सूर्य ऊर्जा को जल्दी ग्रहण करता है। लगातार ताकत के साथ ताली बजाने, जिसमें दोनो हाथॉ की ऊंगलियाँ आपस में टच न हों, से हार्ट के वाल्व मजबूत होते हैं। नृत्य के बाद शुरू होता है पप्पू भैया से वार्तालाप, ऑडियो-वीडियो तथा स्टेज शो के माध्यम से। विभिन्न पौराणिक कथाओं तथा आधुनिक रिसर्च का हवाला देते हुए वे अनेक उपयोगी जानकारियाँ  प्रदान करते हैं जिससे आप अपने शरीर को समझ सकें तथा उसे स्वस्थ, नीरोगी व ऊर्जावान बनाने के लिये सम्यक व्यायाम और सम्यक आहार के बारे में जान सकें। पप्पू भैया आहार के विषय में विस्तृत जानकारियाँ देते है। उनके अनुसार सम्यक व्यायाम के साथ सम्यक आहार नहीं लिया जाये तो बहुत नुकसान पहुँच सकता है। कुछ विशेष  बातें हैं जिनके लिये पप्पू भैया की तारीफ करनी होगी। केम्प सभी धर्म के लोगों के लिये खुला है। सूर्य सभी प्राणियों व पेड पौधों सहित हर इंसान चाहे वह किसी भी जाति का हो अपनी ऊर्जा प्रदान करता है फिर आपस में जातिगत भेदभाव कैसा? पप्पू भैया कहते हैं कि सिर्फ सूर्य को अपना गुरू मानो और किसी अन्य बाबा, गुरू या महात्मा को बीच में मत आने दो। जिस तरह आप किसी मशीन को जाने बिना उसे चला नहीं सकते उसी तरह अपने शरीर के सुपर कम्प्यूटर के बारे में अधिक से अधिक जानों और उसकी केयर करो। माताएँ भी इस बारे में अपने बच्चों को शिक्षित करें। उनके अनुसार हमें हाथ में कोई भी नाडा बान्धने की जरूरत नहीं और न ही किन्हीं रत्नों वाली अँगूठियाँ पहनने की। नृत्य प्रोग्राम के बाद सम्यक आहार के रूप में दो मोसम्बियों के साथ अमरूद, सेब, भीगा मेथी व मूगफली दाने, अलसी, कच्ची लोकी और ताजी बगार लगाई हुई छाछ का नाश्ता दिया जाता है। केम्प में बताई गयी अनेक बातों तथा एलोपेथी अथवा अन्य पेथियों के डाक्टरों के विचारों में विरोधाभास हो सकता है। मगर पप्पू भैया स्वयं कहते हैं कि उनकी बताई हर बात को क्यों क्या और कैसे की कसौटी पर स्वयं परख कर ही अपनायें। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को नाश्ते के लिये अपने साध प्लेट, कटोरी गिलास तथा चाकू लाना होता है ताकि प्लास्टिक डिस्पोजल्स का उपयोग न करना पडे। पुराने जमाने के सामुहिक भोजो की तरह लोग इन्हें बिना शरम अपने साथ ला भी रहें है। कहने की जरूरत नहीं कि अगले दिन से मेरी चाय बिलकुल बन्द हो गयी, सुबह जल्दी उठकर ठन्डे पानी से स्नान का क्रम सम्यक व्यायाम व आहार के साथ शुरू हो गया। सिर्फ दो ही दिनों मे महंगाई सी ऊचाई पर चल रहा मेरा ब्लड शुगर लेवल सेंसेक्स की तरह गिरकर नीचे आ गया। धन्यवाद पप्पू भैया लेते नहीं, कहते हैं कि सूर्यदेव को दे दो अत: उनके और उनके साथियों के इस अभिनव प्रयास के लिये शुभकामनायें। तो इन्दौरीपन की पहचान मगर अस्वाथ्यकर जलेबी-पोहा-समोसा-कचोरी-सेंव को मैने बॉय-बॉय जरूर कह दिया है मगर यदा कदा कभी कभी मिलने का ऑप्शन खुला है, आखिर इन्दौरी हूँ ना।

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