आपने रंग को देखा
होगा, आपने भंग को देखा
होगा,
आपने रंग में भंग को
भी देखा होगा।
आईये आज मैं आपको अपनी
रचनाओं के माध्यम से रंग में भीगा
रचनाओं के माध्यम से रंग में भीगा
हास्य-व्यंग्य
दिखाता हूँ। अर्ज है:-
होली और महंगाई
अच्छा हुआ दोस्त जो
तूने
होली पर रंग लगा कर
हंसा दिया
वरना अपने चेहरे का
रंग तो
महंगाई ने कब का उड़ा
दिया
दुश्मनी भुलाना
कितना आसान है
दुश्मनी को भुलाना
बस दुश्मन को घेरना
और उसे रंग है लगाना
दुश्मनी निभाना (पाकिस्तान के लिये)
कितना आसान है
दुश्मनी को निभाना
बस एक साईकिल एक
टिफिन लेना
और उसमें बम लगाना
होली की गेर
होली की गेर में
सब हैं एक रंग
क्या अमीर क्या गरीब
सब हैं संग संग
बचना प्रिये
मेरे रंग तुम्हारा
चेहरा
होली के दिन बिठाना
पहरा
दिल तुम्हारा पास है
मेरे
अब बचाना अपना चेहरा
ध्वजों ने खेली
होली
अलग अलग धर्मों के ध्वजों
ने
होली मनाई, एक दूसरे
को खूब रंगा
बाद में सबने देखा
तो पता चला
उनमें से हर एक बन
चुका था तिरंगा
मोहब्बत के रंग
होली के रंग आज
लगेंगे
कल उतर जायेंगे
मेरी मोहब्बत के रंग
मगर
जिन्दगी भर साथ
निभाएंगे
रंगों से एलर्जी
आपको रंगों से
एलर्जी है
चलिये आपको रंग नहीं
लगायेंगे
मगर साथ तो बैठियेगा
रंगीन बातों से ही
होली मनाएंगे
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