महेन्द्र सांघी की (कविताओं के विविध रंग
– हास्य और
व्यंग्य लेखों के संग)
एक अजनबी
ने
गली में
खेलती नन्हीं बच्ची से
बड़ प्यार
से पूछा कि
बिटिया
चॉकलेट खाओगी आप?
आखें
तरेर कर बच्ची ने
पलट कर
दिया जवाब
कहा कि
क्यों?
क्या आप
लगते हो मेरे बाप?
अचानक इस
हमले से हकबकाया युवक
बच्ची को
बहलाने का
दूसरा
प्रयास करते हुए
पुन:
प्यार से बोला
बिटिया
मैं तुम्हारा अंकल हूँ,
यदि तुम
मेरी गोद में आओगी
तो न
सिर्फ चॉकलेट बल्कि मुफ्त में
कुरकुरे
और बिस्किट भी पाओगी।
बच्ची ने
कहा कि नहीं
मै तो
अब्बी की अब्बी शोर मचाऊँगी
और मुफ्त
के जूते-चप्पलों से
अंकलजी
आपको पिटवाऊँगी।
अजनबी
युवक समझ गया कि उसका
अब वहाँ
से खिसक लेना ही बेहतर है,
आज देश
की नारियां
यदि
दुर्गा समान हैं तो
आज के
टीवी युग की ये
बच्चियाँ
भी नहीं कमतर हैं।
इस बच्ची
की माँ की तरह
देश की
हर माँ सजग-समझदार बने
और अपनी
नन्हीं बेटी को
सही-गलत
की पहचान बताये,
ताकि
इंसान के वेष में घूमते
कामुक
भेड़िये
उनके
बालपन का फायदा उठाकर
उनका
शोषण न कर पायें।
4 मार्च
2013
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