दोस्तों
आप किसी भी फिल्मी गीत के बोल को ले लीजिये आपको उन बोलों के नेपथ्य में छुपी कोई
न कोई हास्य की मजेदार बात पकड़ में आ ही जायेगी। लीजिये कुछ नमूने देखिये और फिर
खुद कोशिश कर के देखिये।
गीत : तेरी आँखों के
सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
(क्योंकि इन आँखों
का ट्रांसप्लांट मेरी आँखों में जो होने वाला है।)
गीत
: राज की बात कह दूं तो जाने महफिल में फिर क्या हो?
(कुछ
भी नहीं होने वाला। सच का सामना में आज मैं खुद अपना राज खोल कर तगड़ा माल कमाने
वाला हूँ।)
गीत
: गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा, तुम एक पैसा दोगे वे दस लाख देगा
(काश
यह बात सत्ताधारी नेताओं की समझ में आ जाये कि यदि वे जनता को एक पैसा (प्रति रूपये
में से जो पन्द्रह पैसे देते हैं उसके अतिरिक्त) देंगे तो जनता बदले में लाखों
(वोट) देगी ।
गीत
: बिना बदरा के बिजुरिया कैसे चमके
(बेवकूफ
यह बदरा वाली बिजुरिया नहीं एरोप्लेन की लाईट है जो रात में चमक रही है।
गीत
: ये दिल न होता बेचारा
(कितना
अच्छा होता। फिर तो हार्ट अटेक ही नहीं होता।)
गीत
: खिलोना जान कर तुम क्यों मेरा दिल तोड़ जाती हो?
(
क्योंकि घर के दूसरे खिलोने ब्रांडेड और बहुत महंगे हैं।)
गीत
: ये हरियाली और ये रास्ता
(जरूर
बन्दा राष्ट्रपति भवन की सैर करता हुआ गुनगुना रहा है। वरना किसी और रास्ते पर ऐसी
हरियाली कहाँ मिलेगी जो दिल यह गीत गुनगुनाने लगे)
गीत
: सपनों का सौदागर आया
(वोटों
के बदले में सपने बेचने के लिये)
गीत
: मै ना भूलूंगा, मै ना भूलूंगी
(बाप
रे, दोनों भूलने के लिये तैयार नहीं हैं तो फिर तो तलाक निश्चित है।)
गीत : जिन्दगी भर
नहीं भूलेगी ये बरसात की रात
(क्योंकि रेन वाटर
हार्वेस्टिंग करवाने के बाद ये पहली बरसात है जब छत का पानी तेजी से बोरिंग वेल
में जा रहा है।)
गीत : ए मेरे वतन के
लोगों, जरा आँख में भर लो पानी
(क्योंकि पेट्रोल की
बड़ी कीमतें चुकाने में याद आ जायेगी नानी)
गीत : ना मांगू हीरा
मोती, ना मांगू सोना चांदी ये मेरे किस काम के
(मुझे तो बस अपना
वोट दे दे, ये सब तो बाद में खुद-ब-खुद मेरी तिजोरी में चले आयेंगे।)
ग़ीत : बेगानी शादी
में अब्दुल्ला दीवाना
(दीवाना हुए बिना
काम कैसे चलेगा? मेरेज अरेंज करने का कांट्रेक्ट जो लिया है)
महेन्द्र सांघी
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